योजनाएँ

अपना घर को आत्म निर्भर बनाने के लिये तीन महत्वपूर्ण योजनाएँ -

भोजन के लिये - (1) अनन्त आहार योजना

शिक्षा के लिये  -  (2) ज्ञान धारा योजना

आवास के लिये - (3) विकास मित्र योजना

सहज सहयोग - इच्छानुसार योगदान


  • (1) अनन्त आहार योजना - भोजन के लिये

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    अपना घर को आत्मनिर्भर बनाने की महती योजना

    * आप अपने जन्मदिन, विवाह वर्ष ग्रंथि, संस्थान स्थापना या पूर्वजो की समृति को चिरस्थायी बना सकते है।
    * आपका सहयोग अपना घर को आत्मनिर्भर बनाने में महती सहयोग प्रदान करेगा।
    * आपका दान निराश्रित, उपेक्षित, प्रताड़ित व अभावग्रस्त बालिकाओ का जीवन संवारेगा।
    * सहयोग से ये बालिकाएं योग्य बनकर समाज के लिए समस्या नहीं वरदान बनेगी।

    अनन्त आहार योजना विवेचन

    अपना घर बालगृह जन सहयोग से सन 2000 से संचालित किया जा रहा है। जनसहयोग एवं सुदृढ़ प्रशासनिक मार्ग दर्शन से अपना घर निरंतर प्रगति की और अग्रसर होता जा रहा है। विगत 15 वर्षों से बेसहारा, उपेक्षित, प्रताड़ित व आभाव ग्रस्त बालिकाओ की शिक्षा, आवास, भोजन आदि की समुचित व्यवस्था की गई है।
    पूर्व एस.पी. डॉ. जी. के. पाठक ने मानव तस्करी को रोकने के लिए सार्थक प्रयास किये। देह व्यापर करने वाली महिलाओ से 57 बालिकाओ को मुक्त कराया गया। इन बालिकाओ को चुराकर देह व्यापार के लिए बाछड़ा समुदाय को बेचा गया था। कुछ बालिकाओ को उनके माता पिता ने ही बेच दिया था। डॉ. पाठक के इस अभियान की सफलता पर इन्हे अंतराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है।
    इस अभियान से मुक्त बालिकाओ का आश्रय स्थल अपना घर बना। अचानक बालिकाओ की संख्या में वृद्धि होने से अपना घर का खर्च भी तीन गुना बड़ा, भवन भी छोटा पड़ गया। जन भागीदारी से नव निर्माण कराकर इन बालिकाओ को उत्तम सुविधा प्रदान करने के प्रयास चल रहे है। नगर का इस संस्था को महती सहयोग मिलता है, फिर भी इसे आत्मनिर्भर बनाना हमारा लक्ष्य है।
    दान से प्राप्त होने वाली आय अनिश्चित होती है। इस कारण विकास तीव्र गति से नहीं हो पाया है। संस्था के सर्वागीण विकास को दृष्टिगत रखते हुए हम अनंत आहार योजना प्रस्तुत कर रहे है। अनंत आहार योजना के अंतर्गत कुल 1460 सदस्य (365x4) बनाये जायेंगे। प्रत्येक सदस्य अपनी इच्छित दिनांक को वर्ष में एक बार एक समय भोजन कराने के लिए संस्था को सहयोग राशि के रूप में मात्र 5,000/- रूपए प्रदान करेगा।
    1460 सदस्य बन जाने पर संस्था को 5000x1460=73,00,000 /- (73 लाख रूपए) प्राप्त होंगे। सदस्यों से प्राप्त राशि की एफ.डी. कराई जावेगी ।एफ.डी. से प्राप्त होने वाले ब्याज के रूप में प्रतिमाह संस्था को लगभग 70,000/- रूपए प्राप्त होंगे । दान राशि यथावत रहेगी, केवल ब्याज का उपयोग किया जावेगा। ब्याज से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग बालिकाओ की शिक्षा, भोजन, चिकित्सा, आवास व वस्त्र की उत्तम व्यवस्था के साथ ही कर्मचारियों को सम्मानजनक मानदेय देने में किया जावेगा। पांच हजार की राशि समान किश्तों में भी प्रदान की जा सकती है।
    यदि आप इस योजना के सदस्य बनते है। तो आप दोहर पुण्य के अधिकारी होंगे। अन्न दान तथा संस्था को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान आपका आर्थिक संबल इन्हे अँधेरे से प्रकाश की और ले जायेगा। सदस्यता व्यक्तिगत अथवा संस्थागत भी प्राप्त की जा सकती है।

    योजना को संतो का आशीर्वाद

    इस योजना को महत्त्व प्रदान करते हुए अंतराष्ट्रीय राम स्नेही सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर 1008 श्री रामदयाल जी महाराज ने दो सदस्यताएँ ली, निर्वतमान शंकराचार्य महामण्डलेश्वर श्री दिव्यानंद जी तीर्थ ,सत्यमित्रानंद गिरिजी, श्री चिन्मयानंद जी ने एक सदस्यता, क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत मुनि श्री तरुण सागर जी महाराज, मुनि श्री पुलक सागर जी महाराज, आचार्य श्री नवरत्न सागर जी महाराज, आचार्य श्री रामानुज जी व आचार्य श्री नानालाल जी म. सा. ने एक-एक सदस्यता प्राप्त कर आशीर्वाद प्रदान किया।

    योजना का विस्तार

    अन्नत आहार योजना जन-जन की लोकप्रिय योजना होती जा रही है। योजना के सदस्य दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र आदि प्रांतो से बने है। योजना देश में ही नहीं विदेश में भी पहुँच चुकी है। इंग्लैंड व श्रीलंका से सदस्य बनाने में विशेष योगदान श्री रमेश जी मावर का रहा, आपने अपने साले साहब श्री नरेश जी बारोलिया जो इंग्लैंड में निवासरत है को प्रोत्साहित किया। आपके प्रोत्साहन से ही श्री बारोलिया ने 11 सदस्य इंग्लैंड, 1 सदस्य श्रीलंका व एक सदस्य अहमदाबाद से बनाकर कुल 13 सदस्यों का योगदान दिया।
    मन्दसौर शहर के श्री प्रेमेंद्र जी चौरड़िया ने परिवारजनो की 22 सदस्यताएँ, श्रीमती रेणुका जी चौधरी भोपाल ने 9 सदस्यताएँ, श्रीमती वंदना जी लक्कड़ ने 9 सदस्यताएँ, मन्दसौर नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी श्री मोहन लाल जी रिछावरा ने 6 सदस्यताएँ, श्री सौधर्म सुशील जी डोसी ने 6 सदस्यताएँ, श्री भगवानचंद मोहिनानी, सुश्री चन्द्रकला जी विद्यार्थी पूर्व प्राचार्य महारानी लक्ष्मी बाई क. उ. मा. वि. मन्दसौर ने 5 सदस्यताएँ, श्री ग्रेंडी साहब ने 2 सदस्य अमेरिका, 2 सदस्य हरियाणा, 2 सदस्य दिल्ली, 5 सदस्य स्वयं, राव विजय सिंह 6 सदस्यताएँ लेकर उल्लेखनीय कार्य किया।
    आपका संबल मिले ..................... यह सत्य प्रयास सदा चलता रहे।

    राव विजयसिंह
    संस्थापक अध्यक्ष
    स्वाध्याय मंच, अपना घर, मन्दसौर

    शिशु ग्रह एवं दत्तक ग्रहण अभिकरण

    मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नवजात शिशुओ तथा निराश्रित, उपेक्षित, जरूरतमंद तथा समर्पित बच्चे जिनकी आयु 0 से 06 वर्ष की है। उनकी जीवन रक्षा एवं अच्छे परिवार में गोद दिलाने के लिए प्रत्येक जिले में शिशु गृहो की स्थापना की गई है। इसी क्रम में स्वाध्याय मंच को भी शिशु गृह एवं दत्तक ग्रहण अभिकरण की स्वीकृति प्राप्त हुई है। कोई भी दंपत्ति जिनकी सम्मिलित आयु 92 वर्ष से अधिक नहीं है। शिशु गोद ले सकते है। लेकिन निः संतान दंम्पति को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। एकल पुरुष तथा लिव इन रिलेशनशिप को शिशु गोद लेने की पात्रता नहीं होगी। इसके लिए देश में कही भी एक जगह दत्तक ग्रहण अभिकरण में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कारा की गाईड लाइन के अनुसार दत्तक प्रक्रिया पूर्ण होगी। प्रत्येक शिशुगृह के बाहर एक पालना रहेगा, जिसमे कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान बताये बिना शिशु छोड़ सकता है। बच्चो को लावारिस छोड़ने या फेकने के बजाय समर्पित करने के लिए जागरूकता की आवश्यकता है। जन्म लिए हर बच्चे को सुरक्षित जीवन मिले इसके लिए स्वाध्याय मंच कृत संकल्पित है। यदि कही भी त्याज्य शिशु मिले कृपया मो. नं . +91-9424812010 पर तुरंत सुचना देकर जीवन बचाने में सहयोग देंवे।

  • (2) ज्ञान धारा योजना - शिक्षा के लिये

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    ज्ञान धारा योजना सदस्यता फॉर्म डाउनलोड करें।

    अपनाघर में आवासरत बालिकाओं की शिक्षा अच्छे विद्यालयों में हो सके तथा बालिकाओं की शिक्षा वैसी ही हो जैसी एक परिवार अपने बच्चो के लिए करता है, मन्दसौर जिले के पूर्व एस.पी. डॉ जी. के. पाठक ने मानव तस्करी से मुक्त बालिकाओं की उत्तम शिक्षा के लिए विशेष प्रयास किये। नगर के प्रमुख विद्यालय वात्सल्य स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेंटथॉमस स्कूल, दिगम्बर जैन स्कूल, सरस्वती स्कूल, खालसा पब्लिक स्कूल, दशपुर विद्यालय, लोटस वेल्ली स्कूल, डेस्टर किड्स स्कूल आदि ने डॉ. पाठक के सुझावों को सभी प्रचार्यों ने मानते हुए निशुल्क शिक्षण की व्यवस्था प्रदान करने के लिए सहमति प्रदान की।
    इन विद्यालयों द्वारा बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालयीन शिक्षा के लिए पाठ्य सामग्री, गणवेश आवागमन के साधन तथा विद्यालय के पश्चात ट्यूशन की भी आवश्यकता होती है। अपना घर की सभी आवश्यकताएं जनसहयोग से पूरी होती है। अपने बच्चो के लिए तो सभी प्रयास करते है कभी उनके लिए भी कुछ करे जिनका कोई नहीं है जो जरुरत में है। इन बालिकाओ की सेवा कर आपको असीम आंनद के साथ पुण्य प्राप्त होगा।

    ज्ञान धारा योजना की प्रेरणा

    मन्दसौर संसदीय क्षेत्र की युवा सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने 1857 "भारतीय परिपेक्ष्य" पुस्तक लिखी, पुस्तक का विमोचन महामहिम उपराष्ट्रपति जी ने दिल्ली में किया। पूर्व राज्य सभा सदस्य साहित्य शिरोमणी दादा बालकवि जी बैरागी की अध्यक्षता में भोपाल में पुस्तक की समीक्षा की गई। इंदौर के साहित्य प्रेमी श्री समंदर सिंह पटेल ने पुस्तक की पहली प्रति जो मीनाक्षी जी के हस्ताक्षर युक्त है 52 हजार में क्रय की। मीनाक्षी जी ने पहली प्रति से प्राप्त राशि अपना घर को प्रदान कर दी। अपना घर ने निर्णय लिया की इस राशि से ज्ञान धारा योजना प्रारम्भ कर प्राप्त ब्याज से बालिकाओ की शिक्षा का प्रबंध किया जाये। इस योजना को निरंतर रखने के लिए एक-एक हजार रुपयो का सहयोग प्राप्त कर इसे सुस्थापित करे।
    अपना घर बालगृह को शासन से किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग प्राप्त नहीं होता है। ज्ञान धारा योजना निरंतर चलती रहेगी। इस से मिलने वाली राशि की एफ. डी. कराई जाएगी। प्राप्त राशि यथावत रहेगी। केवल ब्याज शिक्षा व्यवस्था पर खर्च किया जायेगा। ज्ञान दान को महादान की श्रेणी में रखा गया है। आप द्वारा दी गई राशि से प्रतिवर्ष मिलने वाला ब्याज इन बालिकाओ में ज्ञान का प्रकाश फैलाएगा । आप केवल एक बार एक हजार सहयोग राशि दीजिये अपने मित्रो को भी इस योजना से जोड़ कर इस योजना को सफल बनाने में योगदान प्रदान करे। ज्ञान धारा योजना में सीधे आप अपना अंशदान स्मृति नागरिक सहकारी बैंक के खाता क्रमांक 10010060094 में जमा कराकर जमा पर्ची में हमें पूर्ण विवरण के साथ भेज सकते है।

    ज्ञान धारा में विशेष योगदान

    1) 52 हज़ार , सुश्री मीनाक्षी नटराजन
    2) 50 हजार , श्रीमती संध्या जी चौधरी, भोपाल
    3) 21 हजार , स्व. श्रीमती सागरबाई जैन, मन्दसौर (गोटे वाले)
    4) 10 हजार , हीरा लालवानी, मन्दसौर
  • (3) विकास मित्र योजना - आवास के लिये

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    आओ बनाये अपना घर

    अपना घर बालगृह में 56 बालिकांए आवासरत है, इनमे से अधिकांश बालिकाएं मानव तस्करी से मुक्त कराई गई गई। डॉ जी. के. पाठक पूर्व एस. पी. मन्दसौर के निर्देशन में चलाये गए मानव तस्करी उन्मूलन अभियान के तहत कई अबोध बालिकाएं मुक्त कराई गई है। यदि यह अभियान निरंतर चले तो कई और बालिकाएं मुक्त हो सकती है। मुक्त बालिकाओ मे से कुछ बालिकाओ को उनके माता-पिता को लौटाया गया है। डॉ. जी. के. पाठक ने इन परिवार को खुशिया लौटाई वंही इस अमानवीय गतिविधि पर रोक भी लगाई। डॉ. पाठक के इस अभियान का जन-जन ने स्वागत करते हुए सराहना की है। बालिकाओ की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
    इस अभियान में मुक्त बालिकाओ के लिए अपना घर के अलावा संभाग में कोई स्थान नहीं है। अपना घर ऐसी सभी बालिकाओ को संरक्षण प्रदान कर रहा है। बढ़ती संख्या तथा भावी वृद्धि को ध्यान में रखते हुए नव निर्माण की आवश्यकता है।
    पुराना भवन जर्जर है। तथा बालिकाओ के आवास एवं स्वास्थ की दर्ष्टिकोण से उपयुक्त नहीं है। हमने विकास मित्र योजना के माध्यम से प्रयास किया है कि इन बालिकाओ को सर्वसुविधा युक्त भवन उपलब्ध कराए। इसमें हमें आंशिक सफलता आप सभी के सहयोग से मिली है। लगभग 14 लाख रूपए की लागत से नव निर्माण कराया गया जिसमे 15x15 का कार्यालय, 28x15 का अध्यन कक्ष तल मंजिल पर, प्रथम मंजिल पर सर्वसुविधा युक्त हॉल 15x48 का जिसमे 20 बालिकाओ के रहने की पूरी व्यवस्था है। इसी हल से जुड़े दो लेट-बाथ भी है। 56 बालिकाओ में से केवल 20 बालिकाओ के लिए उत्तम आवास व्यवस्था कर पाये है, शेष 36 बालिकाओ के लिए व्यवस्था की जाना है। पुराने भवन के एक हिस्से की नव निर्माण योजना बनाई गई है। इस भवन निर्माण पर लगभग 35 लाख रुपये का व्यय आएगा। इस योजना को भी विकास मित्र योजना से पूरा किया जायेगा। योजना के प्रारम्भ में क्षेत्रीय सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने सांसद निधि से 3 लाख रुपये प्रदान किये है। शेष 32 लाख की व्यवस्था जन सहयोग से की जाकर इस योजना को यथा शीघ्र पूर्ण किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा 10 लाख रुपये नव निर्माण के लिए स्वीकृत किये गए है। 10 लाख संस्था ने जमा कराये है। 20 लाख का निर्माण चल रहा है। नीमच नगर के उद्योगपति श्री डी. एस. चौरड़िया द्वारा नवनिर्माण के लिए 4 लाख 25 हजार रूपये विकास मित्र योजना में प्रदान किये गए।

    दत्तक ग्रहण अभिकरण

    निःसंतान दंपत्ति तथा जो निराश्रित व त्याजय बालको को अपनाकर उनका पालन पोषण करना चाहते है। जो बच्चे अपना मौलिक अधिकार पाने के लिए जीवन मृत्यु से संघर्ष कर रहे है। उन्हे नया जीवन देने के लिए आगे आएं। अपना घर में कार्यरत दत्तक ग्रहण अभिकरण से विस्तृत जानकारी प्राप्त करे।

    विकास मित्र योजना

    * केवल एक हजार रुपये प्रदान कर विकास मित्र बने।
    * एक परिवार से एक से अधिक विकास मित्र हो सकते है। प्रत्येक विकास मित्र को एक हजार रुपये का योगदान प्रदान करना है।
    * आप एक से अधिक संस्था के सदस्य हो सकते है। आपको किसी एक संस्था के माध्यम से सदस्यता प्राप्त करना है।
    * लघभग 14,16,500 रुपये का निर्माण कार्य जन भागीदारी से पूर्ण हुआ है। जितना अधिक योगदान आप देंगे उतना ही योगदान सरकार से प्राप्त होगा यानि आप दोहरे पुण्य के भागी होंगे।
    * आप अपने विभाग के सभी कर्मचारी साथियो की सूचि पूर्ण विवरण सहित अपना घर भेज सकते है। सहयोग राशि की रसीद आपके विभाग में भेजी जा सकेगी।
    * आप अपना अंशदान सीधे अपना घर के भारतीय स्टेट बैंक नई आबादी शाखा के खाता क्रमांक 53025313955 में जमा कर जमा पर्ची में हमें पूर्ण विवरण के साथ भेज सकते है।
    * आप अपना योगदान स्वाध्याय मंच कार्यालय एल. आई. जी-बी 4, लॉ कालेज के सामने संजीत मार्ग, मन्दसौर या अपना घर सीतामऊ फाटक टोड़ी पर राशि जमा करा कर रसीद प्राप्त कर सकते है।
    * अपना घर के बारे में आप विस्तृत जानकारी चाहते है तो कृपया राव विजयसिंह (संस्थापक अध्यक्ष) मो नं-+91-9424812010 या ब्रजेश जोशी (अध्यक्ष) मो नं- +91-9425107356 पर संपर्क करे।

  • सहज सहयोग - इच्छानुसार योगदान