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अपना घर - बालगृह : एक परिचय

स्वाध्याय मंच द्वारा अपना घर का संचालन सन 29 सितम्बर 2000 से प्रारम्भ किया गया यह एक मात्र बालिका आश्रय गृह है जहाँ निराश्रित , उपेक्षित , प्रताड़ित एवं मानव तस्करी से मुक्त बालिकाओं को प्रवेश दिया जाता है । इस बाल गृह में प्रवेश लेने वाली बालिकाओं की शिक्षा , आवास व भोजन की उत्तम व्यवस्था जन सहयोग से की जाती है । संस्था को आत्म निर्भर बनाने के लिए तीन योजनाएँ , अनन्त आहार योजना, ज्ञान धारा योजना व विकास मित्र योजना प्रारम्भ की गई है । आप किसी भी योजना में सहभागी होकर इन बालिकाओं के जीवन को संवारनें में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है ।

1990 से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गांधी विचार धारा के प्रचार प्रसार में लगी संस्था स्वाध्याय मंच द्वारा अपना घर बाल गृह का सफल संचालन सन 2000 से किया जा रहा है । संभाग का यह एक मात्र बाल गृह है, जहाँ निराश्रित , उपेक्षित , प्रताड़ित एवं मानव तस्करी से मुक्त बालिकाओं को प्रवेश दिया जाता है । यहाँ प्रवेश पाने वाली बालिकाएँ जिला प्रशासन , पुलिस प्रशासन , चाइल्ड लाइन जिला बाल कल्याण समिति व सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से आती है । वर्तमान में 56 बालिकाएँ आश्रयरत है ।

संस्था का आर्थिक आधार जनभागीदारी है । विगत 15 वर्षों से बिना किसी शासकीय अनुदान के मात्र जनभागीदारी से आवासरत बालिकाओं की शिक्षा , चिकित्सा , भोजन , वस्त्र व आवास की उत्तम व्यवस्था प्रदान की जा रही है ।

जन सहयोग से हमें वाद्य यन्त्र , सिलाई मशीनें व कंप्यूटर तत्कालीन विधायक श्री ओमप्रकाश जी पुरोहित से प्राप्त हुई । संगीत की पुस्तकें व वाद्ययन्त्र सुश्री चन्द्रकला विद्यार्थी तथा एक कंप्यूटर श्री श्याम जी कहार द्वारा व भारतीय स्टेट बैंक नई आबादी द्वारा दो कम्प्यूटर तथा शिक्षा की पुस्तकें प्रदान किए गए।

श्री रमेश जी मावर की प्रेरणा से श्री नरेश की बारोलिया इंग्लैंड ने टी. वी. प्रोजक्टर साउंड सिस्टम, फ्रिज , वाशिंग मशीन , वाटर पंप , वाटर हीटर , पलंग आदि अपना घर को भेट किये।

संगीत सिलाई मशीन व कम्प्यूटर शिक्षा व्यवस्था के लिए शिक्षको की नियुक्ति की जाना है। इसके लिए अर्थ की आवश्यकता होगी। जन सहयोग से इसे पूर्ण किया जायेगा।

अपना घर के सफल संचालन के लिए 7 कर्मचारी कार्यरत है - अधीक्षिका , अध्यापिका , कम्प्यूटर शिक्षक , 2 रसोईया , पुरुष चौकीदार तथा महिला चौकीदार इन सभी को मानदेय की व्यवस्था के साथ ही बालिकाओ की शिक्षा,वस्त्र , भोजन व विद्युत आदि पर अनुमानित व्यय 60 हजार रूपए प्रतिमाह होता है। जो बालिकाओ की संख्या के आधार पर घटता बढ़ता रहता है।

जनभागीदारी से अपना घर आत्मनिर्भर हो जाये , इसी उद्देश्य को लेकर अन्नत आहार योजना प्रस्तुत की गई। हमारा प्रयास है की आम जनता बालगृह से जुड़े, अपनी आय में से कुछ प्रतिशत राशि इन बच्चो के लिए निकाले। इस संस्था को आदर्श बनाने में योगदान प्रदान करे। कम से कम एक परिवार से एक अनंत आहार का सदस्य बनकर महती योगदान प्रदान करे।